
उत्तर प्रदेश की राजनीति में चुनाव आयोग (Election Commission of India) की Special Intensive Revision (SIR) प्रक्रिया के बाद बड़ा प्रशासनिक भूचाल आया है।
मुख्य निर्वाचन अधिकारी नवदीप रिणवा ने पुष्टि की है कि यूपी के 2 करोड़ 89 लाख वोटरों के नाम ड्राफ्ट मतदाता सूची से हटा दिए गए हैं।
पहले जहां उत्तर प्रदेश में कुल मतदाता संख्या 15.44 करोड़ थी, अब SIR के बाद यह घटकर 12.55 करोड़ रह गई है।
यानि, वोटर लिस्ट में इतिहास की सबसे बड़ी क्लीनिंग ड्राइव।
क्यों हटे इतने वोटर? जानिए SIR की असली वजह
SIR प्रक्रिया के दौरान सामने आया कि:
- 46 लाख वोटर मृत पाए गए
- बड़ी संख्या में डुप्लीकेट और शिफ्टेड मतदाता
- कुछ मामलों में फर्जी या अपूर्ण रिकॉर्ड
शुरुआती आंकड़ों में करीब 2.97 करोड़ वोटरों के नाम हटने की बात सामने आई थी, लेकिन वेरिफिकेशन के बाद यह संख्या 2.89 करोड़ पर आकर स्थिर हुई।
मतलब साफ है—अब “नाम है तो वोट है” वाली पुरानी सोच नहीं चलेगी।
SIR Timeline: कब क्या हुआ?
- 27 अप्रैल 2025 – SIR अभियान की शुरुआत
- 26 नवंबर 2025 – पहला चरण पूरा
- 31 दिसंबर 2025 – ड्राफ्ट लिस्ट जारी होनी थी
- तारीख बढ़ाकर 6 जनवरी 2026 कर दी गई
नवदीप रिणवा के मुताबिक, तकनीकी और प्रशासनिक कारणों से ड्राफ्ट लिस्ट एक हफ्ते लेट हुई।
Draft Voter List कहां देखें?
मतदाता चुनाव आयोग की आधिकारिक वेबसाइट पर जाकर ड्राफ्ट लिस्ट देख सकते हैं। अगर आपका नाम लिस्ट में नहीं है — तो घबराइए नहीं, अभी मौका बाकी है।

Claim–Objection Window: आखिरी मौका!
- दावा और आपत्तियां: 6 जनवरी से 6 फरवरी 2026
- निस्तारण प्रक्रिया: 6 जनवरी से 27 फरवरी 2026
इस दौरान:
- नाम जुड़वाया जा सकता है
- गलत डिलीशन पर आपत्ति दर्ज कराई जा सकती है
- विवरण में सुधार कराया जा सकता है
जो चूका, वो मतदाता सूची से गया!
“लोकतंत्र में भी अब KYC जरूरी”
एक समय था जब राशन कार्ड से वोट बन जाता था, अब हाल ये है कि लोकतंत्र में भी Full KYC + Ground Verification जरूरी हो गया है। “अगर आप जिंदा हैं, तो खुद साबित करना पड़ेगा!”
— यही संदेश है SIR 2026 का।
उत्तर प्रदेश की यह वोटर लिस्ट रिवीजन सिर्फ आंकड़ों का खेल नहीं, बल्कि 2027 की राजनीति की नींव है। अब असली सवाल ये नहीं कि कौन वोट देगा, बल्कि ये है कि किसका नाम वोटर लिस्ट में बचेगा।
